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Class 10th History Chapter 1 Notes In Hindi

Class 10th History Chapter 1 Notes In Hindi: यूरोप में राष्ट्रवाद नोट्स

Class 10th History Chapter 1 Notes In Hindi: हेलो बच्चो, इस आर्टिकल लेख के माध्यम से क्लास 10 हिस्ट्री चैप्टर 1 का नोट्स दिया गया है।

इसलिए यदि आप भी मैट्रिक बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे है, तो आपके लिए यह आर्टिकल लेख काफी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इस लेख के माध्यम से में कक्षा 10 वीं इतिहास के पहले चैप्टर (यूरोप में राष्ट्रवाद) की सम्पूर्ण तैयारी कराया गया है। 

Class 10th History Chapter 1 Notes In Hindi
Class 10th History Chapter 1 Notes In Hindi

Class 10th History Chapter 1 Notes In Hindi – OverAll

Textbook NCERT
Class Class 10th
Subject History
Chapter Chapter 1
Chapter Name यूरोप में राष्ट्रवाद
Medium Hindi
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Class 10 History Chapter 1 – One Short Notes

महत्वपूर्ण तथ्य

फ्रांस के दार्शनिक रेनन ने राष्ट्र को एक बड़ी और व्यापक एकता की संज्ञा दी जिसे फ्रांसीसी कलाकार को सारयू ने अपनी कल्पना से चित्रित कर उसका प्रभावकारी बिम्ब प्रस्तुत किया।

शिक्षित मध्यमवर्ग की प्रभावपूर्ण उपस्थिति और कुलीनों की जीवन शैली का प्रभाव राष्ट्रवाद के विकास में सहायक होते हैं।

1789 की क्रांति के बाद राजशाही को समाप्त कर, फ्रांसीसी क्रांतिकारियों ने यूरोप में राष्ट्रवाद की स्थापना की।

नेपोलियन ने स्वयं के विजित राज्यों में नेपोलियन संहिता लागू कर सामंती विशेषाधिकार समाप्त कर कानून के समक्ष सबको बराबरी का अधिकार दिया, जिस पर तानाशाही के विरुद्ध आवाजें उठी।

कानून के समक्ष सबको बराबरी, निरंकुशवाद के स्थान पर संविधान और प्रतिनिधि सरकार की स्थापना पर बल, आर्थिक क्षेत्र में मुक्त व्यापार का समर्थन तथा व्यक्ति की स्वतंत्रता पर बल दिया जाता है।

मेटरनिक व्यवस्था द्वारा निरंकुशवाद को बढ़ावा और राष्ट्रवाद व संसदीय प्रणाली के विकास को रोकने का प्रयास किया गया। पर, क्रांतियों ने उदारवाद और राष्ट्रवाद के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

वहीं रूमानीवादियों ने संस्कृति द्वारा राष्ट्रवाद की भावना का विकास किया।

ब्रिटेन में राष्ट्रवादियों ने 1707 के ‘ऐक्ट ऑफ यूनियन’ द्वारा यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन का गठन किया।

ऑस्ट्रिया, जर्मनी, हंगरी और बोहेमिया में 1848 में क्रांतियां हुईं और फ्रांस में द्वितीय गणराज्य की स्थापना हुई।

यूरोप का मरीज’ कहलाने वाले ऑटोमन साम्राज्य की दुर्बलता का लाभ उठाकर 1832 में कुस्तुनतुनिया की संधि द्वारा स्वतंत्र यूनान राष्ट्र की स्थापना की।

1870 में एकीकृत इटली का जन्म मेजिनी, काबूर और गैरीबाल्डी तथा विक्टर इमैनुएल के प्रयासों द्वारा हुआ।

1871 में प्रशा के नेतृत्व में बिस्मार्क की (रक्त और तलवार) की नीति द्वारा जर्मनी का एकीकरण हुआ।

संसाधन के तहत पर्यावरण के वे सारे अवयव आते हैं। जो विद्यमान तकनीक की सहायता से मानव जीवन की आवश्यकतओं को पूर्ण करने की क्षमता रखते हैं।

तकनीक अथवा प्रौद्योगिकी का विकास मानव की क्षमता और कुशलता पर निर्भर करता है।

संसाधन होते नहीं, बनते हैं। संसाधन का निर्माता एवं उपभोगकर्ता. दोनों मानव ही है। मानव भी एक संसाधन है।

मनुष्य के आर्थिक विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धि व उनका सार्थक प्रयोग, दोनों अत्यावश्यक है।

     संसाधनों का वर्गीकरण-     

1. उपलब्धता के आधार पर : प्रकृतिप्रदत्त एवं मानवकृत

2. स्रोत के आधार पर : जैविक और अजैविक

3. पुनः प्राप्ति के आधार पर : नवीकरणीय एवं अनवीकरणीय

4. स्वामित्व के आधार पर : निजी, सामुदायिक, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय

5. विकास के स्तर के आधार पर : संभाव्य, ज्ञात, भंडारित एवं संचित

☞ प्रकृति द्वारा हमें उपलब्ध कराई गई सभी वस्तुएँ एवं पदार्थ जैसे- हवा, जल, भूमि इत्यादि प्रकृतिप्रदत्त संसाधन हैं, जबकि भवन, सड़क, रेल लाइन, स्कूल, कॉलेज एवं अन्य संस्थान इत्यादि मानवकृत संसाधन हैं, तथा, पेड़, पौधे, जीव-जंतु, पशु-पक्षी, मानव इत्यादि जैविक संसाधन हैं।

☞ वातावरण के सभी निर्जीव पदार्थ जैसे- खनिज, चट्टान, मिट्टी, नदियाँ, पर्वत, पठार इत्यादि अजैविक संसाधन है।

☞ प्रकृति द्वारा स्वतः बननेवाले संसाधन, जैसे- सूर्य-प्रकाश, हवा, पानी, पेड़-पौधे, जीव-तंतु इत्यादि नवीकरणीय संसाधन हैं।

☞ एक बार प्रयोग होने पर खत्म हो जानेवाले संसाधन, जैसे- कोयला, पेट्रोलियम एवं अन्य खनिज अनवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं।

☞ मकान, कृषि, भूमि, कार, मोटरसाइकिल, टेलीफोन, साइकिल इत्यादि निजी संसाधन कहलाते हैं। जबकि चारागाह, मंदिर, खेल का मैदान, तालाब, श्मशन भूमि, बाजार, पंचायत भूमि, विद्यालय भवन, पर्यटन स्थल इत्यादि सामुदायिक संसाधन कहलाते हैं।

☞ किसी देश के अंदर पाए जानेवाले सभी प्रकार के संसाधन राष्ट्रीय संसाधन कहलाते हैं। सागर तट से दूर 19.2 कि०मी० तक का भाग राष्ट्रीय संपत्ति कहलाता है।

☞ 19.2 कि०मी० के बाहर का सागरीय क्षेत्र एवं उसमें पाया जानेवाले संसाधन अंतरराष्ट्रीय संसाधन कहलाती हैं।

☞ वैसे संसाधनों का उपयोग जो वर्तमान में किसी कारण से नहीं हो रहे हों परंतु जिनके उपयोग होने की संभावना हो, संभाव्य संसाधन कहलाते हैं। जैसे- भारत में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा इत्यादि।

Class 10th History Chapter 1 Question Answer

कक्षा 10वीं इतिहास अध्याय 1 का सारे प्रश्न एवं उत्तर नीचे दिया गया हैं, इसलिए आप सभी ध्यान पूर्वक पढ़े…एवं याद करें। क्योंकि यहां से आपके बोर्ड परीक्षा में बहुत सारा प्रश्न पूछा जाता हैं।

Class 10 History Chapter 1 Objective Question Answer In Hindi

क्लास 10 हिस्ट्री ऑब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर (Class 10 History Chapter 1 Objective Question Answer ) नीचे ऑप्शन के साथ दिया गया है, अतः आप सभी नीचे दिए गए सभी प्रश्नों का आंसर याद करें….

Class 10 History Chapter 1 Subjective Questions Answer

दोस्तों, नीचे हिस्ट्री क्लास 10 चैप्टर 1 के सभी अतिलघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उसका उत्तर दिया गया है।

Class 10 History Chapter 1 One Linear Subjective Questions Answer 

     अति लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर     

प्रश्न 1. राष्ट्रवाद क्या है ? 

उत्तर – राष्ट्रवाद आधुनिक विश्व की राजनीतिक जागृति का प्रतिफल है। यह एक ऐसी भावना है जो किसी भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में एकता की वाहक बनती है।

प्रश्न 2. मेजनी कौन था ?

उत्तर – मेजनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था । उसमें आदर्श गुण अधिक और व्यावहारिक गुण कम थे । इटली के एकीकरण में मेजनी का महत्त्वपूर्ण योगदान था ।

प्रश्न 3. जर्मनी के एकीकरण की बाधाएँ क्या थीं ?

उत्तर- जर्मनी पूरी तरह से विखंडित राज्य था जिसमें लगभग 300 छोटे-बड़े राज्य थे । उनमें धार्मिक, राजनीतिक तथा सामाजिक विषमताएँ भी मौजूद थीं। वहाँ प्रशा शक्तिशाली राज्य था एवं अपना प्रभाव बनाए हुए था। उनमें जर्मन राष्ट्रवाद की भावना का अभाव था, जिसके कारण एकीकरण का मुद्दा उनके समक्ष नहीं था ।

प्रश्न 4. मेटरनिख युग क्या है ?

उत्तर- नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप की विजयी शक्तियाँ आस्ट्रिया की राजधानी वियना में 1815 ई० में एकत्रित हुई। इनका उद्देश्य यूरोप में पुनः उसी व्यवस्था को कायम करना था। जिसे नेपोलियन के युद्धों और विजयों ने अस्त-व्यस्त कर दिया था। 1815 ई० में एकत्रित वियना कांग्रेस का नेतृत्व आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने किया था जो घोर प्रतिक्रियावादी था । 1815 से 1848 तक के काल को यूरोप में मेटरनिख युग के नाम से जाना जाता है।

Class 10th History Chapter 1 Short Subjective Question Answer 

      लघु उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर     

प्रश्न 1. 1848 ई० के फ्रांसीसी क्रांति के क्या कारण थे ?

उत्तर – लुई फिलिप एक उदारवादी शासक था किंतु वह बहुत ही महत्त्वाकांक्षी शासक था । उसने अपने विरोधियों को खुश करने के लिए स्वर्णिम मध्यम वर्गीय नीति का अवलम्बन करते हुए 1840 ई० में गीजो को प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जो कट्टर प्रतिक्रियावादी था। वह किसी भी तरह के वैधानिक, सामाजिक एवं आर्थिक सुधारों के विरुद्ध था । लुई फिलिप ने पूँजीपति वर्ग को साथ रखना पसंद किया जिसे शासन में कोई अभिरुचि नहीं थी और जो अल्पमत में भी था । उसके पास कोई भी सुधारात्मक कार्यक्रम नहीं था और न ही उसे विदेश नीति में ही किसी तरह की सफलता हासिल हो रहा था। उसके शासनकाल में भुखमरी एवं बेरोजगारी व्याप्त होने लगी जिसके कारण 1848 की क्रांति हुई ।

प्रश्न 2. इटली, जर्मनी के एकीकरण में आस्ट्रिया की भूमिका क्या थी ?

उत्तर – आस्ट्रिया, इटली और जर्मनी के एकीकरण का सबसे बड़ा विरोधी था । आस्ट्रिया के हस्तक्षेप से इटली में जनवादी आंदोलन को कुचल दिया गया । आस्ट्रिया का चांसलर मेटरनिख पुरातन व्यवस्था का समर्थक था। आस्ट्रिया को पराजित किए बिना इटली और जर्मनी का एकीकरण संभव नहीं था । अतएव काबूर ने आस्ट्रिया को पराजित करने के लिए फ्रांस के साथ मिलकर क्रीमिया युद्ध में भाग लिया और फ्रांस का राजनीतिक समर्थन प्राप्त किया । 1860-61 में काबूर ने सिर्फ रोम को छोड़कर उत्तर तथा मध्य इटली के सभी रियासतों (परमा, मोडेना, टसकनी, फब्वारा, बेलाजोना आदि) को मिला लिया । 1871 ई० तक इटली का एकीकरण, मेजनी, काबूर और गैरीबाल्डी जैसे राष्ट्रवादी एवं विक्टर इमैनुएल जैसे शासकों के योगदान के कारण पूर्ण हुआ ।

जर्मनी में राष्ट्रीय आंदोलन में शिक्षण संस्थानों, बुद्धिजीवियों, किसानों, कलाकारों का महत्त्वपूर्ण योगदान था । यद्यपि आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए दमनकारी कानून चार्ल्सवाद के आदेश को जारी किया परंतु जर्मनी में राष्ट्रीयता की प्रबल धारा प्रवाहित हो रही थी जिसने एकीकरण के काम को आगे बढ़ाने में सहायता प्रदान की । 1866 ई० में आस्ट्रिया ने प्रशा के खिलाफ सेडोवा में युद्ध की घोषणा कर दी और उसमें वह बुरी तरह पराजित हुआ । इस तरह आस्ट्रिया का जर्मन क्षेत्रों से प्रभाव समाप्त हो गया और प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी का एकीकरण सम्पन्न हुआ, जिसमें बिस्मार्क की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी।

प्रश्न 3. यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट किस तरह सहायक हुआ ?

उत्तर-यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना के विकास में फ्रांस की राज्यक्रांति तत्पश्चात् नेपोलियन के आक्रमणों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। यूरोप के कई राज्यों में नेपोलियन के अभियानों द्वारा नवयुग का संदेश पहुँचा। नेपोलियन ने जर्मनी और इटली के राज्यों को भौगोलिक नाम की परिधि से बाहर कर उसे वास्तविक एवं राजनीतिक रूपरेखा प्रदान की, जिससे इटली और जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। दूसरी तरफ नेपोलियन की नीतियों के कारण फ्रांसीसी प्रभुत्व’ और आधिपत्य के विरुद्ध यूरोप में देश भक्तिपूर्ण विक्षोभ भी जगा। इस प्रकार यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट की अहम भूमिका थी ।।

प्रश्न 4. गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें ।

उत्तर-गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों तथा स्वयं सेवकों की सशस्त्र सेना बनायी। उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किए। इन रियासतों की अधिकांश जनता वूर्बो राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गयी । गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ की सत्ता संभाली । दक्षिणी इटली के जीते गए क्षेत्रों को बिना किसी संधि के गैरीबाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया। वह अपनी सारी सम्पत्ति राष्ट्र को समर्पित कर साधारण किसान की भाँति जीवन जीने की ओर अग्रसर हुआ। इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी का महत्त्वपूर्ण योगदान था ।

प्रश्न 5. विलियम 1 के बगैर जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए असंभव था, कैसे ?

उत्तर-विलियम प्रथम राष्ट्रवादी विचारों का पोषक था। उसके सुधारों के फलस्वरूप जर्मनी में औद्योगिक क्रांति की हवा तेज हो गयी साथ ही आधारभूत संरचना में भी काफी सुधार हुए, जिससे जर्मन राष्ट्रों को एकता के सूत्र में बाँधने के प्रयास तेज हुए। विलियम ने एकीकरण के उद्देश्य को ध्यान में रखकर महान कूटनीतिज्ञ बिस्मार्क को अपना चांसलर नियुक्त किया । बिस्मार्क का मानना था कि सैन्य उपाय से ही जर्मनी का एकीकरण संभव है। अतः उसने रक्त और लौह की नीति का अवलम्बन किया । अन्ततः प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी का एकीकरण संभव हुआ जिसमें विलियम । का महत्त्वपूर्ण योगदान था। अगर बिस्मार्क को विलियम 1 का नमर्थन नहीं मिलता तो जर्मनी का एकीकरण असंभव था ।

Class 10th History Chapter 1 Long Subjective Question Answer 

     दीर्घ उत्तरीय प्रश्न एवं उत्तर।     

प्रश्न 1. इटली के एकीकरण में मेजनी, कावूर और गैरीबाल्डी के योगदान को बतावें ।

उत्तर- इटली के एकीकरण में मेजनी, काबूर और गैरीवाल्डी के निम्न्नलिखित योगदान थे-

मेजनी – मेजनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था । मेजनी सम्पूर्ण इटली का एकीकरण कर उसे एक गणराज्य बनाना चाहता था जबकि सार्डिनिया पिडनौंट का शासक चार्ल्स एलबर्ट अपने नेतृत्व में सभी प्रांतों का विलय चाहता था। उधर पोप भी इटली को धर्मराज्य बनाने का पक्षधर था। इस तरह विचारों के टकराव के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग अवरुद्ध हो गया था । कालांतर में आस्ट्रिया द्वारा इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किए जाने लगे जिसमें सार्डिनिया के शासक चार्ल्स एलबर्ट की पराजय हो गयी । आस्ट्रिया के हस्तक्षेप से इटली में जनवादी आंदोलन को कुचल दिया गया। इस प्रकार मेजनी की पुनः हार हुई और वह पलायन कर गया ।

1848 ई० तक इटली के एकीकरण के लिए किए गए प्रयास वस्तुतः असफल हो रहे परंतु धीरे-धीरे इटली में इन आंदोलन को कारण जनजागरूकता बढ़ रही थी और राष्ट्रीयता की भावना तीव्र हो रही थी। इटली में मार्हिनिया पिडमांट का नया शासक विक्टर इमैनुएल राष्ट्रवादी विचारधारा का था और उसके प्रयास से इटली के एकीकरण का कार्य जारी रहा। अपनी नीति के क्रियान्वयन के लिए विक्टर ने काउंट काबूर को प्रधानमंत्री नियुक्त किया ।

काउंट काबूर – काबूर एक सफल कूटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी था। वह इटली के एकीकरण में सबसे बड़ी बाधा आस्ट्रिया को मानता था। अतः उसने आस्ट्रिया को पराजित करने के लिए फ्रांस के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया। 1953-54 ई० के क्रीमिया युद्ध में काबूर ने फ्रांस की ओर से युद्ध में सम्मिलित होने की घोषणा कर फ्रांस का राजनीतिक समर्थन हासिल किया । काबूर ने नेपोलियन III से भी एक संधि की जिसके तहत फ्रांस ने आस्ट्रिया के खिलाफ पिडमौण्ट को सैन्य समर्थन देने का वादा किया। बदले में नीस और सेवाय नामक दो रियासतें काबूर ने फ्रांस को देना स्वीकार किया ।

1860-61 में काबूर ने सिर्फ रोम को छोड़कर उत्तर तथा मध्य इटली की सभी रियासतों (परमा, मोडेना, टसकनी, फव्वारा, बेलाजोना आदि) को मिला लिया तथा जनमत संग्रह कर इसे पुष्ट भी कर लिया । 1862 ई० तक दक्षिण इटली रोम तथा वेनेशिया को छोड़कर बाकी रियासतों का विलय रोम में हो गया और सभी ने विक्टर इमैनुएल को शासक माना ।

गैरीबाल्डी – इसी बीच महान क्रांतिकारी गैरीबाल्डी सशस्त्र क्रांति के द्वारा दक्षिणी इटली के रियासतों के एकीकरण तथा गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास कर रहा था। गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों तथा स्वयं सेवकों की सशस्त्र सेना बनायी। उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किए। इन रियासतों की अधिकांश जनता बूर्बो राजवंश के निरंकुशशासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गई। गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ की सत्ता संभाली। दक्षिणी इटली के जीते हुए क्षेत्र को बिना किसी संधि के गैरीवाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया । उसने अपनी सारी सम्पत्ति राष्ट्र को समर्पित कर दी।

प्रश्न 2. जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें ।

उत्तर – बिस्मार्क जर्मन डायट में प्रशा का प्रतिनिधि हुआ करता था और अपनी सफल कूटनीति का लगातार परिचय देता आ रहा था। वह निरंकुश राजतंत्र का समर्थन करते हुए जर्मनी के एकीकरण के प्रयास में जुट गया। यह उसकी कूटनीतिक सफलता थी कि चाहे उदारवादी राष्ट्रवादी हों या कट्टरवादी राष्ट्रवादी सभी उसे अपने विचारों का समर्थक समझते थे । बिस्मार्क जर्मन एकीकरण के लिए ‘रक्त और लौह’ नीति का अवलम्बन किया। उसने अपने देश में अनिवार्य सैन्य सेवा लागू कर दी।

बिस्मार्क ने अपनी नीतियों से प्रशा का सुदृढ़ीकरण किया। बिस्मार्क ने आस्ट्रिया के साथ मिलकर 1864 ई० में श्लेशविग और हॉलेस्टीन राज्यों के मुद्दे को लेकर डेनमार्क पर आक्रमण कर दिया क्योंकि उन पर डेनमार्क का नियंत्रण था। जीत के बाद श्लेशविग प्रशा के अधीन हो गया और हॉलेस्टीन आस्ट्रिया को प्राप्त हुआ। चूँकि इन दोनों राज्यों में जर्मनों की संख्या अधिक थी अतः प्रशा ने जर्मन राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़काकर विद्रोह फैला दिया जिसे कुचलने के लिए आस्ट्रिया की सेना को प्रशा के क्षेत्र को पार करते हुए जाना था और प्रशा ने आस्ट्रिया क ऐसा करते से रोक दिया। 1866 ई० में आस्ट्रिया ने प्रशा के खिलाफ सेडोवा में युद्ध की घोषणा कर दी और आस्ट्रिया युद्ध में बुरी तरह पराजित हुआ । इस तरह आस्ट्रिया का जर्मन क्षेत्र से प्रभाव समाप्त हो गया और इस तरह जर्मन एकीकरण का दो तिहाई कार्य पूरा हो गया ।

शेष जर्मनी के लिए फ्रांस से युद्ध करना आवश्यक था । क्योंकि जर्मनी के दक्षिणी रियासतों के मामले में फ्रांस हस्तक्षेप कर सकता था। 19 जून, 1870 ई० को फ्रांस के शासक नेपोलियन ने प्रशा के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और सेडान की लड़ाई में फ्रांसीसियों की जबर्दस्त हार हुई। 10 मई 1871 ई० को फ्रैंकफर्ट की संधि के द्वारा दोनों राष्ट्र के बीच शांति स्थापित हुई। इस प्रकार सेडान के युद्ध में ही एक महाशक्ति के पतन पर दूसरी महाशक्ति जर्मनी का उदय हुआ ।

अन्ततः जर्मन 1871 ई० तक एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में यूरोप के राजनीतिक मानचित्र में स्थान पाया ।

प्रश्न 3. राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभाव का वर्णन करें ।

उत्तर – राष्ट्रवाद आधुनिक विश्व की राजनीतिक जागृति का प्रतिफल है। यह एक ऐसी भावना है जो किसी विशेष भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहनेवाले लोगों में एकता की वाहक बनती है ।

राष्ट्रवाद की भावना का बीजारोपण यूरोप में पुनर्जागरण के काल में ही हो चुका था। परन्तु 1789 ई० की फ्रांसीसी क्रांति से यह उन्नत रूप में प्रकट हुई। 19वीं शताब्दी में तो यह उन्नत एवं आक्रामक रूप में सामने आई ।

यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना के विकास में फ्रांस की राज्य क्रांति तत्पश्चात नेपोलियन के आक्रमणों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया । फ्रांसीसी क्रांति ने राजनीति को अभिजात्यवर्गीय परिवेश से बाहर कर उसे अखबारों, सड़कों और सर्वसाधारण की वस्तु बना दिया । यूरोप के कई राज्यों में नेपोलियन के अभियानों द्वारा नवयुग का संदेश पहुँचा। नेपोलियन ने जर्मनी और इटली के राज्यों को भौगोलिक नाम की परिधि से बाहर कर उसे वास्तविक एवं राजनीतिक रूपरेखा प्रदान की, जिससे इटली और जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। दूसरी तरफ नेपोलियन की नीतियों के कारण फ्रांसीसी प्रभुता और आधिपत्य के विरुद्ध यूरोप में देशभक्तिपूर्ण विक्षोभ भी जगा ।

राष्ट्रवाद ने न सिर्फ दो बड़े राज्यों के उदय को ही सुनिश्चित नहीं किया बल्कि अन्य यूरोपीय राष्ट्रों में भी इसके कारण राजनीतिक उथल-पुथल शुरू हुए । हंगरी, बोहेमिया तथा यूनान में स्वतंत्रता आंदोलन इसी राष्ट्रवाद का परिणाम था। इसी के प्रभाव ने ओटोमन साम्राज्य के पतन की कहानी को अंतिम रूप दिया । बालकन क्षेत्र में राष्ट्रवाद के प्रसार ने स्लाव जाति को संगठित कर सर्बिया को जन्म दिया ।

इस प्रकार यूरोप में जन्मी राष्ट्रीयता की भावना ने प्रथमतः यूरोप को एवं अन्ततः पूरे विश्व को प्रभावित किया, जिसके फलस्वरूप यूरोप के राजनीतिक मानचित्र में बदलाव तो आया ही साथ-साथ कई उपनिवेश भी स्वतंत्र हुए ।

प्रश्न 4. जुलाई 1830 ई० की क्रांति का विवरण दें।

उत्तर – चार्ल्स दशम एक निरंकुश एवं प्रतिक्रियावादी शासक था, जिसने फ्रांस में उभर रही राष्ट्रीयता तथा जनतंत्रवादी भावनाओं को दबाने का कार्य किया। उसने अपने शासनकाल में संवैधानिक लोकतंत्र की राह में कई गतिरोध उत्पन्न किए। उसके द्वारा नियुक्त प्रधानमंत्री पोलिग्नेक ने पूर्व में लुई अठारहवें के द्वारा स्थापित समान नागरिक संहिता के स्थान पर शक्तिशाली अभिजात्य वर्ग की स्थापना तथा उसे विशेषाधिकार से विभूषित करने का प्रयास किया ।

उसके इस कदम को उदारवादियों ने चुनौती तथा क्रांति के विरुद्ध षडयंत्र समझा । प्रतिनिधि सदन एवं दूसरे उदारवादियों ने पोलिग्नेक के विरुद्ध गहरा असंतोष प्रकट किया। चार्ल्स दशम ने इस विरोध की प्रतिक्रियास्वरूप 25 जुलाई, 1830 ई० को चार अध्यादेशों द्वारा उदार तत्त्वों का गला घोंटने का प्रयास किया । इन अध्यादेशों के विरोध में पेरिस में क्रांति की लहर दौर गई और फ्रांस में 28 जून 1830 ई० से गृहयुद्ध आरंभ हो गया, इसे ही जुलाई 1830 ई० की क्रांति कहा जाता है । परिणामतः चार्ल्स दशम को फ्रांस की राजगद्दी त्यागकर इंगलैण्ड भागना पड़ा और इस प्रकार फ्रांस में बूर्बो वंश के शासन का अंत हो गया ।

फ्रांस में 1830 ई० की क्रांति के परिणामस्वरूप बूबों वंश के स्थान पर आर्लेयेंस वंश को गद्दी सौंपी गई। इस वंश के शासक लुई फिलिप ने उदारवादियों, पत्रकारों तथा पेरिस की जनता के समर्थन से सत्ता प्राप्त की थी। अतएव उसकी नीतियाँ उदारवादियों के पक्ष में तथा संवैधानिक गणतंत्र के निमित रही ।

प्रश्न 5. यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन का संक्षिप्त विवरण दें ।

उत्तर – यूनान का अपना गौरवमय अतीत रहा है जिसके कारण उसे पाश्चात्य इतिहास का स्त्रोत माना जाता था । यूनानी सभ्यता की साहित्यिक प्रगति, विचार, दर्शन, कला, चिकित्सा विज्ञान आदि क्षेत्र की उपलब्धियाँ यूनानियों के लिए प्रेरणा स्रोत थे। पुनर्जागरण के काल में इनसे प्रेरणा लेकर पाश्चात्य देशों ने अपनी तरक्की शुरू की। परन्तु इसके बाबजूद भी यूनान तुर्की के अधीन था ।

फ्रांसीसी क्रांति से यूनानियों में राष्ट्रीयता की भावना की लहर जागी, क्योंकि धर्म, जाति और संस्कृति के आधार पर उनकी पहचान एक थी। फलतः तुर्की शासन से अलग होने के लिए आंदोलन की शुरूआत हुई। इसके लिए इन्होंने हितेरिया फिलाइक नामक संस्था की स्थापना ओडेसा नामक स्थान पर की। इसका उद्देश्य तुर्की शासन को यूनान से निष्कासित कर उसे स्वतंत्र बनाना था । क्रांति के नेतृत्व के लिए यूनान में शक्तिशाली मध्यम वर्ग का उदय हो चुका था।

यूनान सारे यूरोपवासियों के लिए प्रेरणा एवं सम्मान का पर्याय था। इंगलैंड का महान कवि लॉर्ड वायरन यूनानियों की स्वतंत्रता के लिए यूनान में ही शहीद हो गया। इससे यूनान की स्वतंत्रता के लिए सम्पूर्ण यूरोप में सहानुभूति की लहर दौड़ने लगी। उधर रूस भी अपनी साम्राज्यवादी महत्त्वाकांक्षा तथा धार्मिक एकता के कारण यूनान की स्वतंत्रता का पक्षधर था ।

यूनान में विस्फोटक स्थिति तब बन गई जब तुर्की शासन द्वारा यूनानी स्वतंत्रता संग्राम में संलग्न लोगों को बुरी तरह कुचलना शुरू किया गया । 1821 ई० में अलक्जेंडर चिपसिलांटी के नेतृत्व मे यूनान में विद्रोह शुरू हो गया । रूस का जार अलक्जेंडर व्यक्तिगत रूप से तो यूनानी राष्ट्रीयता के पक्ष में था परंतु आस्ट्रिया के प्रतिक्रियावादी शासक मेटरनिख के दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आ पा रहा था। जब नया जार निकोलस आया तो उसने खुलकर यूनानियों का समर्थन किया। अप्रैल 1826 ई० में ग्रेट ब्रिटेन और रूस में एक समझौता हुआ कि वे तुर्की-यूनान विवाद में मध्यस्थता करेंगे। 1827 ई० में लंदन में एक सम्मेलन हुआ जिसमें इंगलैंड, फ्रांस तथा रूस ने मिलकर तुर्की के खिलाफ तथा यूनान के समर्थन में संयुक्त कार्यवाही करने का निर्णय लिया। इस प्रकार तीनों देशों की संयुक्त सेना नावारिनों की खाड़ी में तुर्की के खिलाफ एकत्रित हुई ।

तुर्की के समर्थन में सिर्फ मिस्त्र की सेना आई। युद्ध में मिस्त्र और तुर्की की सेना बुरी तरह पराजित हुई फिर अन्ततः 1829 ई० में एड्रियानोपल की संधि हुई, जिसके तहत तुर्की की नाम मात्र की प्रभुता में यूनान को स्वायत्तता देने की बात तय हुई। परन्तु यूनानी राष्ट्रवादियों ने संधि की बातों को मानने से इंकार कर दिया। उधर इंगलैण्ड और फ्रांस भी यूनान पर रूस के प्रभाव की अपेक्षा इसे स्वतंत्र देश बनाना बेहतर मानते थे । फलतः 1832 ई० में यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया गया । बबेरिया के शासक ओटो को स्वतंत्र यूनान का राजा घोषित किया गया ।

Hindi Nibandh For Class 10: हिंदी निबंध 10वी 2024 बोर्ड परीक्षा में ये 10 निबंध पूछा जाएगा।

Conclusion

अतः इस आर्टिकल लेख के माध्यम से मैने आप सभी को Class 10th History Chapter 1 Notes In Hindi, Class 10 History Chapter 1 Question Answer, Class 10th History Chapter 1 Objective Question Answer, Class 10 History Chapter 1 Subjective Question Answer बताया हूं। उम्मीद करते है, आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। धन्यवाद…

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